Memories from childhood-II

                    यादें.... बचपन की -II

इसके पहले भाग में मैंने अपने बचपन के दिनों के एक रोचक घटना का उल्लेख किया था । इस भाग में एक और घटना का उल्लेख करने जा रहा हूँ । 

गाँव में हमारी दोस्तों की मंडली हुआ करती थी ,जिसे लोग बच्चा पार्टी बुलाया करते थे । हमारी मंडली की खास बात यह थी हम अपनी जरूरतों को स्वयं पूरी करने में सक्षम थे । हमारी जरूरतें जैसे गेंद ,लकड़ी का बल्ला ,विकेट कभी -कभी मिथुन दा ,अजय देवगन ,अक्षय कुमार की मार -धाड़ से भरपूर फिल्मों को देखने के लिए V.C.R आदि । हमारी पार्टी तब सक्रिय होती थी जब गाँव में किसी के घर कुछ काम चल रहा हो ,जैसे जब किसी के यहाँ फर्नीचर का काम चल रहा होता था तब हम बल्ला ,विकेट बनवाने पहुंच जाया करते थे । जब कही किसी के खेत में धान की बुवाई होती थी तो हम धान मांगने पहुंच जाते थे। धान ना मिलने पे गाते थें -

                                       "आल -आल बकरी ,तुम्हारा सब धान खखरी "

और तब तक गाते थे जब तक हमें धान मिल न जाये। और धान इकट्ठा करके दुकान में जा कर बेच आते थें। धान के बदले मिले पैसों को अपने पार्टी फण्ड में रख देते थें और जरुरत पड़ने पे उसे खर्च करते थें। 

जब कहीं इंट का भट्ठा लगता था तो हम वहां भी पहुँच जाते थें। कच्ची इंट बनाने एवं सुखाने में हम से जितना बन पाता हम करतें थें । जब इंटों को पकने के लिए छोड़  दिया जाता था तब हम अपना हक़ मांगने पहुँच जातें थे और उनसे पैसों की मांग करतें थें। पैसे मिल जाने पर फिर गाना गाते थें -

                        "मसूरी के दाल ,भट्ठा लाल-लाल "

हमसे ये तुकबंदी सुन कर भट्ठा के मालिक खुश हो जातें थें …… 


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